Friday, 28/2/2020 | 1:54 UTC+0
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किडनी स्टोन – समझें किडनी के इशारे

एक शोध के अनुसार 08 प्रतिशत लोग देश में किडनी और इससे जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं। किडनी का गर्मियों में ख्याल रखना जरूरी है। यह काम करना बंद कर दे तो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है। ब्लड फिल्टर के रूप में कार्य करने वाले इस अंग के बिना व्यक्ति का जीवित रहना मुश्किल है। सेहत के लिए जरूरी है कि यह सही कार्य करती रहे। यह पीठ में पसलियों के नीचे और बींस के आकार की होती है। यह लाखांे सूक्ष्म तंतुओं से बनी हैं जिन्हें नेफ्रॉन्स कहते हैं। गुर्दे से जुड़े रोग अधिकतर नेफ्रॉन्स की गड़बड़ी से होते हैं। किडनी खून को साफ करने की प्रक्रिया के दौरान नुकसानदायक तत्वों व अतिरिक्त पानी को छानकर यूरिन के रूप में शरीर से बाहर निकालती है। इसके अलावा शरीर में पानी के अलावा सोडियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस तथा पोटेशियम जैसे मिनरल्स का संतुलन बनाए रखती है। यह बीपी और शुगर लेवल को भी कंट्रोल करती है। यह सोडियम व कैल्शियम के अलावा अन्य मिनरल्स के अवशेष बारीक कणों के रूप में निकालकर यूरेटर के माध्यम से ब्लैडर तक पहुंचाती है, जो यूरिन के साथ बाहर निकल जाते हैं। कभी-कभी रक्त में इन तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है और यह किडनी में जमा होकर कणों या पत्थर के टुकड़ों का आकार ले लेते हैं और इनसे ब्लैडर तक यूरिन पहुंचाने के रास्ते में रूकावट आती है। पानी तथा तरल पदार्थाे को कम लेने के कारण व यूरिनरी ट्रैक में संक्रमण की वजह से यह समस्या हो सकती है। पेट में दर्द होना, बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होना, रूक-रूक कर दर्द के साथ यूरिन आना साथ में रक्त आना, कम्पकंपी के साथ बुखार आना, भूख न लगना और जी मिचलाना आदि इसके लक्षण हैं। रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं। किडनी की नियमित जांच करवाएं। पहले से उच्च रक्तचाप या डयबिटीज (शुगर) की समस्या हो तो भोजन में प्रोटीन, सोडियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा सीमित रखें। चीनी व नमक का इस्तेमाल सीमित करें। ऐसा करके इससे बचाव हो सकता है।

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