Friday, 28/2/2020 | 3:05 UTC+0
MY DAWA CHARCHA

विडम्बना

  1. औषधि नियंत्रण आदेश के अन्तर्गत आने वाले एक ही साल्ट के विभिन्न ब्रांडों के फार्मूलेशन की कीमतों में भारी अंतर मिलता है।
  2. लैब में जांच के पश्चात अवमानक घोषित होने के बाद भी उन बैच नम्बरों की दवाएं बाजार में बिकती रहती हैं।
  3. विदेशों मेें हानिकारक घोषित प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री भारत में उनकी निर्माता कम्पनियां धड़ल्ले से करती रहती है।
  4. नशे की दवाओं के छोटे-छोटे तस्कर प्रतिदिन पकडे़ जाते हैं परन्तु बड़ी मछलियां पुलिस और औषधि विभाग के हाथ नहीं आती।
  5. अस्पतालों में अक्सर डाक्टर अनुपस्थित रहते हैं, परन्तु अस्पताल के समय मंे अपने प्राइवेट नर्सिंग होम क्लीनिक में उपस्थित रहते हैं।
  6. रोगी व्यक्ति अस्पताल की बजाए डाक्टर के प्राइवेट क्लीनिक/निवास पर ही जांच करवाने को क्यों अधिमान देते हैं।
  7. अस्पताल में दवाइयां खरीद पर भारी बजट मिलता है परन्तु दवाइयां अस्पतालों से गायब रहती हैं।
  8. नकली उत्पादों के निर्यात में संलिप्त लोगों को पकड़े जाने पर सजा का डर नहीं होता क्योंकि मौजूदा कानून में सख्त सजा का प्रावधान ही नहीं है।
  9. विश्व में स्वास्थ्य पर हो रही रिसर्च का महज 10 प्रतिशत उन बीमारियों पर खर्च होता है जिनसे विश्व के 90 प्रतिशत लोग पीड़ित हैं।

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